एक बेटा जवान, एक बेटा किसान | गरीब किसान की देशभक्ति कविता / ek-beta-jawan-ek-beta-kisan-hindi-poem








            भारत की मिट्टी में आज भी ऐसे लाखों किसान बसते हैं,
जो खुद भूखे रहकर भी देश का पेट भरते हैं।
जिनकी झोपड़ी छोटी होती है, लेकिन सपने आसमान से बड़े।
एक पिता चाहता है कि उसका बेटा सीमा पर तिरंगे की रक्षा करे,
तो दूसरा खेतों में अन्न उगाकर देश को जीवन दे।

यह कविता सिर्फ एक गरीब किसान की कहानी नहीं,
बल्कि उस हर पिता की आवाज़ है
जो अपने खून और पसीने से भारत का भविष्य लिखता है।
एक ऐसी भावनात्मक कविता,
जहाँ देशभक्ति भी है, संघर्ष भी है
और मिट्टी से जुड़ा हुआ सच्चा स्वाभिमान भी।







     एक बेटा जवान, एक बेटा किसान

                                   ✍️  किशोर 



मैं हूँ एक गरीब किसान,
माटी ही मेरी पहचान।
टूटी छप्पर, सूखी आँखें,
फिर भी सीना रहे महान।

मेरे आँगन के दो दीपक,
मेरे जीवन के अरमान—
एक सीमा पर डट जाएगा,
एक थामेगा खेत-खलिहान।

एक तिरंगे की रक्षा में,
सीने पर गोली खाएगा,
दूजा तपती धूप में जलकर,
धरती पर सोना उगाएगा।

एक लहू से देश बचाए,
एक पसीने से पेट भरे,
दोनों मेरे लाल हैं ऐसे,
जिनसे भारत माँ निखरे।

न धन-दौलत की चाह मुझे,
न महलों का कोई मान,
बस इज्जत की रोटी मिल जाए,
यही है मेरा अभिमान।

मर जाऊँ तो इतना करना,
माटी का तिलक लगा देना,
एक के खून, एक के पसीने को
भारत माँ पर सजा देना।

मैंने इस धरती का नमक खाया,
अब कर्ज़ इसे चुका जाऊँ,
“जय जवान, जय किसान” की
मैं जीती-जागती आवाज़ बन जाऊँ।

लोग याद करें पीढ़ियों तक,
ऐसा कोई काम कर जाऊँ,
चाहे छोटा जीवन हो मेरा,
पर देश के काम तो आ जाऊँ।

मैं हूँ एक गरीब किसान,
बस इतना सा है अरमान—
एक बेटा सीमा का प्रहरी हो,
एक बने धरती की शान।



               ❤️  कड़क संदेश 


देश केवल हथियारों से सुरक्षित नहीं रहता,
और न ही सिर्फ खेतों से समृद्ध बनता है।
देश को मजबूत बनाता है
सीमा पर खड़ा जवान
और खेत में झुककर मेहनत करता किसान।

एक अपने खून से तिरंगे की लाज बचाता है,
तो दूसरा अपने पसीने से करोड़ों लोगों की भूख मिटाता है।

इसलिए याद रखिए—
अगर जवान देश की ढाल है,
तो किसान देश की जान है।


      🇮🇳 जय जवान • जय किसान 🇮🇳




🫸 देशप्रेम की एक और मार्मिक कविता 🫷



                    आज देश में चारों तरफ घूस का बोलबाला है। सरकारी ऑफिस में बिना पैसा का एक भी काम नहीं होता है। सारा सरकारी तंत्र घूस की इस तूफान में डूब चुका है। इसी पर पढ़िए कवि की एक करुण और मार्मिक अपील वाली कविता। 

                      कविता पढ़ने के लिए नीचे लिखे कविता के टाईटल पर क्लिक कीजिए - 




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