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उसकी माँ / Usaki Maa | भाग- छठा | आखिरी सांसों का वादा | कुमार सरोज | किशोरवाणी |

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          💔 उसकी माँ                      अभी तक आपने पढ़ा....                      सौम्या को उसका पति उसे उस समय घर से निकाल देता है जब वह मां बनने वाली रहती है। फिर भी वह हिम्मत नहीं हारती है और फिर से अपनी जिंदगी की शुरुआत नए सिरे से करती है। उसे सरकारी नौकरी लग जाती है। तभी अचानक एक दिन उसका पति उसे वापस अपने घर ले जाने के लिए आ जाता है।  क्या सौम्या दुबारा अपने पति के घर जाएगी? जानने के लिए पढ़िए इस भाग को......      आख़िरी साँसों का वादा                       ( भाग - छठा )                                    ✍️  कुमार सरोज                      बनारस की शाम धीरे-धीरे रात की गोद में समा रही थी।       ...

बिंदिया और बबलू - अध्याय– 25 | नवादा का सरकारी विद्यालय | हिंदी उपन्यास | कुमार सरोज | किशोरवाणी |

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              👩‍❤️‍👩   बिंदिया और बबलू  👩‍❤️‍👩                       अभी तक आपने पढ़ा.......                             बबलू, बिंदिया, सुधा और रंजीत को पता चला कि सुधा को बचपन में चाकंद के अनाथालय में रखा गया था। वहीं से उन्हें एक नया सुराग मिला—रामनाथ मिश्र, नवादा के एक पुराने स्कूल शिक्षक, जिनके पास बबलू के भाई अंकित के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती थी।        लेकिन नवादा जाने से पहले रास्ते में एक चेतावनी मिली—     “ नवादा मत जाना।” बबलू ने इसे खतरा नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण माना कि वे सही दिशा में बढ़ रहे हैं।  अब सबकी मंजिल थी— नवादा।            नवादा का सरकारी विद्यालय                   ( अध्याय - 25 )                 ...

दस हाथों वाली माँ | भाग :- तीसरा | माँ दुर्गा की शक्ति और एक माँ के संघर्ष की भावुक कहानी | कुमार सरोज | किशोरवाणी |

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              💅  दस हाथों वाली मां     अभी तक आपने पढ़ा........                  अनामिका जो की मां दुर्गा की परम भक्त थी का बनाया प्रोजेक्ट उसके ऑफिस का बॉस चुराकर अपने नाम से कर लेता है। जब वह इस बात का विरोध करती है तो उसे ऑफिस से निकाल देने की धमकी दी जाती है।               उधर उसकी बेटी सिया के साथ सोशल मीडिया पर कुछ लोग गंदे गंदे कॉमेंट करते रहते हैं। वह भी बहुत परेशान थी।                दोनों मां बेटी को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। अंत में एक बार फिर दोनों अपनी परेशानी को मां दुर्गा के ऊपर छोड़ देती हैं।            क्या मां दुर्गा अनामिका और उसकी बेटी की परेशानी दूर कर पाएंगी ?                  दस हाथों वाली मां                   ( भाग - तीसरा )   ...

उसकी माँ / Usaki Maa | भाग- पांच | लौटकर आया अतीत | कुमार सरोज | किशोरवाणी |

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     💔 उसकी माँ          अभी तक आपने पढ़ा......                   सौम्या अपने घर वालों से बगावत करके जिस इंसान से शादी करती है, वह उसे कुछ ही महीनों के बाद निकाल देता है। उस समय वह मां बनने वाली थी। उसके बाबजूद भी सौम्या हार नहीं मानती है और अपनी जीवन को नए तरीके से शुरू करती है और। सरकारी नौकरी हासिल कर लेती है। मगर तभी उसके जीवन में फिर से उसका पति राज आ जाता है।   अब सौम्या के साथ क्या होने वाला है? राज फिर वापस उसके जीवन में क्यों आया था?                   पढ़िए इस भाग में........         लौटकर आया अतीत                        ( भाग - पांच)                                  ✍️  कुमार सरोज                     सुबह से ही स...

अपनों के बीच अकेला | एक विद्यार्थी के अपमान और संघर्ष की मार्मिक कहानी | काजल कुमारी | किशोरवाणी |

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                  कभी-कभी इंसान को सबसे गहरे घाव गैरों से नहीं, बल्कि अपनों से मिलते हैं। जिन रिश्तों के बीच उसे अपनापन, सम्मान और सहारा मिलना चाहिए, उन्हीं रिश्तों के बीच उसका आत्मसम्मान धीरे-धीरे दम तोड़ने लगता है।        " अपनों के बीच अकेला’    हिमांशु की ऐसी ही दर्दभरी कहानी है, जो अपने गाँव मंझौल से शहर पढ़ने आया है। आँखों में बेहतर भविष्य के सपने लिए हिमांशु दिनभर पढ़ाई के साथ घर के कामों में भी जुटा रहता है। लेकिन उसकी मेहनत को सम्मान मिलने के बजाय उसे ताने, गालियाँ और अपमान सहना पड़ता है। आखिर कब तक वह अपने आँसुओं को छिपाकर सब कुछ सहता रहेगा? क्या अपनों के बीच रहने वाला हिमांशु कभी अपनेपन का एहसास कर पाएगा?            यह कहानी केवल एक विद्यार्थी की पीड़ा नहीं, बल्कि उन अनगिनत युवाओं के संघर्ष का आईना है, जो अपने भविष्य को सँवारने के लिए घर-परिवार से दूर रहकर पढ़ाई करते हैं।                अपनों के बीच अकेला    ...

बिंदिया और बबलू :- अध्याय– 24 | अंकित की तलाश | हिंदी उपन्यास | कुमार सरोज | किशोरवाणी |

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         👩‍❤️‍👩  बिंदिया और बबलू  👩‍❤️‍👩 अभी तक आपने पढ़ा...... पुराने घर के तहखाने से बबलू, बिंदिया, रंजीत और सुधा को सहयोग मंडल से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले। उनमें यह खुलासा हुआ कि हरिहर सिंह बबलू और उसके परिवार की संपत्ति के संरक्षक थे। सबसे बड़ा रहस्य तब सामने आया, जब एक दस्तावेज में लिखा मिला— “जब तीनों बच्चे फिर एक साथ होंगे, तभी यह अधिकार सक्रिय होगा।” लेकिन तहखाने से बाहर किसी ने एक चेतावनी छोड़ दी— “अब अगला नंबर अंकित का है।” बबलू को समझ आ गया कि उसका खोया हुआ भाई सिर्फ अतीत का हिस्सा नहीं है। वह आज भी किसी ऐसे व्यक्ति के निशाने पर है, जो वर्षों पुराने रहस्य को सामने नहीं आने देना चाहता।         अब पढ़िए आगे......                   अंकित की तलाश               ( अध्याय - 24 )                                  ✍️  कुमार सरोज...