तुम्हें नज़र न लगे – एक मासूम मोहब्बत की खूबसूरत ग़ज़ल / tumhe-nazar-na-lage-romantic ghazal in hindi-
कभी-कभी मोहब्बत इतनी मासूम होती है कि उसे दुनिया की नज़र से बचाने का मन करता है।
ये ग़ज़ल उसी एहसास की कहानी है—जहाँ एक दिल, दूसरे दिल को इतनी सच्चाई से चाहता है कि उसे हर बुरी नज़र से छुपा लेना चाहता है।
यह सिर्फ इश्क़ नहीं, बल्कि उस इश्क़ की दुआ है… कि जिस पर दिल आ जाए, उसे कभी कोई नज़र न लगे।
❤️ तुम्हें नज़र न लगे
✍️ किशोर
नज़र को नज़र की नज़र न लगे,
कोई अच्छा भी इस क़दर न लगे।
तुम्हें देखा है मैंने उस नज़र से,
जिस नज़र से तुम्हें नज़र न लगे।
तेरी आँखों में एक जहाँ बसता है,
मगर उस जहाँ को ख़बर न लगे।
तेरे लफ़्ज़ों में है कोई जादू सा,
दिल सुने और फिर सफ़र न लगे।
तेरे होने से महक उठती हैं राहें,
बिन तेरे ये कोई शहर न लगे।
तेरी मुस्कान का असर ऐसा है,
ग़म भी आए तो वो असर न लगे।
तेरे ख्यालों में खोया रहता हूँ,
अब तो खुद का भी मुझको डर न लगे।
तू मिले तो ये जिंदगी लगती है,
वरना जीना भी कुछ हुनर न लगे।
तू ही मंज़िल, तू ही मेरा रास्ता,
तेरे बिना कोई भी डगर न लगे।
तेरे इश्क़ में इतना डूबा हूँ मैं,
अब किसी और की नज़र न लगे।
💘 प्यारा संदेश
सच्ची मोहब्बत हमेशा दिखाने के लिए नहीं होती, कुछ रिश्ते बस दिल में बसाए जाते हैं… नज़र से दूर, मगर एहसास के बेहद करीब।
अगर किसी को आप इतनी शिद्दत से चाहते हैं कि उसकी खुशी ही आपकी दुआ बन जाए, तो समझ लीजिए—वो इश्क़ बहुत खास है।
बस यही दुआ है… आपकी मोहब्बत भी हर बुरी नज़र से महफूज़ रहे।
❤️ प्रेम की एक और ग़ज़ल ❤️
" इकरार का दिन " भी एक बहुत ही खूबसूरत गजल है। प्रेम अपनी प्रेमिका को कितनी बेपनाह मोहब्बत करता है पढ़कर इसे आप भी महसूस कीजिए।
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