इकरार का दिन – दिल को छू लेने वाली प्रेम कविता | / ikrar-ka-din-hindi-love-poem
इकरार का दिन एक ऐसी प्रेम कविता है, जो दिल की खामोश धड़कनों को आवाज़ देती है। जब लब खामोश होते हैं और आँखें अपने जज़्बात बयां करती हैं, तब मोहब्बत का असली इज़हार होता है। यह कविता इश्क़, एहसास और समर्पण की उस खूबसूरत दुनिया में ले जाती है, जहाँ हर मुश्किल आसान लगने लगती है।
इकरार का दिन
✍️ किशोर
मत पूछो हाल-ए-दिल मेरा,
ये इज़हार का दिन आया है।
खामोश लबों की बस्ती में,
धड़कनों ने शोर मचाया है।
आँखों में जो थे ख्वाब छुपे,
आज उन्हें सजने दो ज़रा।
तेरी यादों की महफ़िल में,
दिल को बहकने दो ज़रा।
लब खामोश सही लेकिन,
साँसों में तेरी सरगम है।
हर धड़कन ये कहती है,
तू ही मेरा मरहम है।
फूलों ने राहें थाम लीं,
हवाओं ने गीत सुनाए हैं।
तेरी बाँहों की छाँव तले,
आज सारे ग़म पराए हैं।
चाँद भी ठहरा सा लगता है,
सितारों की उस महफ़िल में।
तेरे हुस्न का नूर समाया,
मेरे हर इक हासिल में।
ज़िन्दगी की हर मुश्किल अब,
आसान सी हो जाती है।
जब तेरी मोहब्बत की खुशबू,
मेरे दिल को छू जाती है।
ये दिन है सिर्फ़ इश्क़ का,
ये दिन है दिल के करार का।
तेरी मोहब्बत में खो जाने,
तेरे संग हर इकरार का।
मत पूछो हाल-ए-दिल मेरा,
ये इकरार का दिन आया है।
आज तेरी आँखों में मैंने,
अपना जहाँ बसाया है।
( 28 फरवरी 2025 )
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Nice
जवाब देंहटाएंजी बहुत बहुत धन्यवाद
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