आखिर नारी तेरे रूप कितने ? | एक कड़वा सच और प्रेरणादायक कविता / aakhir- naari -Tere -roop- kitane - hindi - poem
समाज में नारी को कभी देवी का स्थान दिया गया, तो कभी उसी नारी को कठोर सवालों के घेरे में खड़ा किया गया।
एक ही स्त्री, जो सृजन की शक्ति है, वही कभी त्याग और ममता की मूर्ति बन जाती है, तो कभी हालात और स्वार्थ के भंवर में अपनी ही पहचान खो बैठती है।
यह कविता नारी के उन्हीं विरोधाभासी रूपों को उजागर करती है—जहां एक ओर वह जीवन देती है, वहीं दूसरी ओर कभी-कभी जीवन के मूल्य भूल जाती है।
यह सिर्फ एक प्रश्न नहीं, बल्कि एक आईना है—जिसमें नारी स्वयं को देख सकती है, समझ सकती है और अपने भीतर छिपी असली शक्ति को पहचान सकती है।
आखिर नारी तेरे रूप कितने ?
✍️ किशोर
कभी सीता बन संग अपने पति,
वन-वन पथ पर चलती हो,
तो कभी सुहाग की पहली रात छोड़,
परछाइयों में ढलती हो।
आखिर नारी तेरे रूप कितने?
कभी सावित्री बन अपने पति के,
प्राण यम से छीन लाती हो,
तो कभी स्वार्थ की अंधी दौड़ में,
उसी का जीवन हर जाती हो।
आखिर नारी तेरे रूप कितने?
माँ बनकर अपनी बेटी के लिए,
चाँद सा वर तुम चाहती हो,
वही सास बन बहू के सपनों को,
दहेज की आग में जलाती हो।
आखिर नारी तेरे रूप कितने?
कभी लक्ष्मीबाई बन मातृभूमि पर,
वीरता की मिसाल बन जाती हो,
तो कभी मोह-माया के जाल में फँसकर,
सम्मान स्वयं ही खो जाती हो।
आखिर नारी तेरे रूप कितने?
नारी की सबसे बड़ी शत्रु भी,
आज स्वयं ही नारी बन बैठी है,
जुल्म की चिंगारी भी तुम हो,
और राख में सुलगती पीड़ा भी तुम ही है।
आखिर नारी तेरे रूप कितने?
कोख में पलती एक मासूम कली को,
खुद ही मुरझाने देती हो,
भूल जाती हो उस सच्चाई को,
कि तुम भी कभी एक बेटी थी।
आखिर नारी तेरे रूप कितने?
आज वही नारी, नारी की इज्जत को,
बाजारों में बिकने देती है,
कुछ सिक्कों की खनक के आगे,
मानवता को झुकने देती है।
आखिर नारी तेरे रूप कितने?
अभी भी वक्त है, खुद को पहचानो,
अपने अस्तित्व को तुम जानो,
अब नारी, नारी की दुश्मन नहीं—
उसकी ताकत और सम्मान बनो।
तोड़ दो हर बेड़ी, हर बंधन,
अपने भीतर की ज्वाला जगाओ,
तुम केवल प्रश्न नहीं इस समाज की—
तुम ही उत्तर बनकर उभर आओ।
आखिर नारी, तेरे रूप नहीं गिने जाते—
तू तो स्वयं सृष्टि का आधार कहलाती है।
💔🔥 प्यारा संदेश
नारी, तू केवल एक शरीर या रिश्तों की पहचान नहीं—
तू इस सृष्टि की आत्मा है, शक्ति है, आधार है।
समय आ गया है कि तू खुद को दूसरों की नजरों से नहीं,
बल्कि अपनी आत्मा की सच्चाई से पहचाने।
अब जरूरत है कि नारी, नारी की दुश्मन नहीं—
उसकी ढाल, उसकी ताकत और उसका सम्मान बने।
क्योंकि जिस दिन नारी ने नारी का साथ देना सीख लिया,
उस दिन कोई भी ताकत उसके अस्तित्व को झुका नहीं पाएगी।
👉 तू सवाल नहीं है, तू ही हर सवाल का जवाब है।
🫸 एक और दूसरी प्यारी कविता 🫷
" घूस का तूफ़ान " भी एक बहुत ही मार्मिक कविता है। घूस हमारे समाज का बहुत ही बड़ा कलंक है मगर यह कम नहीं हो रहा है बल्कि और बढ़ता ही जा रहा है। सभी आज घूस लेना शान समझते हैं।
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