अधूरी चाय – एक दिल छू लेने वाली भावुक हिंदी कहानी | Adhuri Chai Hindi Story

  
वो मेज़ वही थी, वही पुरानी खुशबू थी,
बस वक़्त की चादर ने, कुछ यादें ढक दी थीं।

लबों तक आते-आते, सवालात रुक गए,
जो कहने थे जज़्बात, वो चाय में घुल गए।

मिले तो सही, पर मंज़िलें जुदा थीं,
हमारी अधूरी चाय ही, हमारी आख़िरी वफ़ा थी।"







                    अधूरी चाय

                                      ✍️ किशोर 



                 शहर के उस मशहूर 'पुरानी यादें' कैफे में आज भी वही पुरानी लकड़ी की मेजें और धीमी रोशनी थी। बाहर रिमझिम बारिश हो रही थी, बिल्कुल वैसी ही जैसी दस साल पहले हुई थी।

        किशोर खिड़की के पास वाली मेज पर बैठा अपनी घड़ी देख रहा था। तभी दरवाजे की घंटी बजी और एक जानी-पहचानी आहट अंदर दाखिल हुई। वह श्वेता थी। वक्त ने उसके चेहरे पर कुछ लकीरें जरूर खींच दी थीं, पर उसकी आँखों की चमक वही थी।

" देर हो गई ? " श्वेता ने सामने बैठते हुए पूछा।

" दस साल की देरी के सामने दस मिनट क्या हैं, " किशोर ने फीकी मुस्कान के साथ कहा।

वेटर आया। 

किशोर ने बिना पूछे ऑर्डर दिया— "दो अदरक वाली कड़क चाय।"

श्वेता चौंकी, "तुम्हें अभी भी याद है ?।"

किशोर खामोश रहा। 

चाय आई, धुआं उठता हुआ, वही खुशबू। दोनों के बीच सन्नाटा था, पर जेहन में यादों का शोर था। वही कॉलेज के दिन, वही वादे, और फिर करियर और परिवार के दबाव में वो एक 'अलविदा' जो कभी पूरा नहीं हो पाया था।

" सुना है तुम अब शहर के बड़े वकील बन गए हो ? " श्वेता ने चुप्पी तोड़ी।

" और तुम ? सुना है तुम्हारा बेटा बिल्कुल तुम्हारी तरह पेंटिंग करता है। " 
किशोर ने चाय का कप उठाते हुए कहा।

बातों का सिलसिला चला। पुरानी शरारतें, सादे सपने और उन सपनों के टूटने का दर्द। 

बातों-बातों में वक्त पंख लगाकर उड़ गया। श्वेता ने घड़ी देखी, उसे घर निकलना था। जिम्मेदारियों की डोर उसे खींच रही थी।

" मुझे अब चलना चाहिए, किशोर। " 
मीरा उठी और अपना पर्स संभाला।

किशोर ने देखा, श्वेता के कप में अभी भी आधी चाय बाकी थी। वही चाय जो कभी उनकी बातचीत का केंद्र हुआ करती थी, आज ठंडी पड़ चुकी थी।

"।तुम्हारी चाय... अधूरी रह गई। " 
अविनाश ने धीरे से कहा।

श्वेता दरवाजे की तरफ मुड़ी और रुककर बोली - 
 " किशोर , कुछ कहानियाँ और कुछ चाय... अधूरी ही अच्छी लगती है। अगर पूरी हो जाती, तो शायद आज हम इस तरह मिल न पाते। "

श्वेता बाहर बारिश में ओझल हो गई। किशोर वहीं बैठा रहा। सामने दो कप थे। एक खाली और एक में 'अधूरी चाय'। उसने महसूस किया कि वह चाय ठंडी जरूर थी, पर उसमें यादों की मिठास अभी भी वैसी ही थी।

           कुछ कहानियों का मुकम्मल होना ज़रूरी नहीं होता, वैसे ही कुछ चाय ठंडी होकर ही, रूह को सुकूँ दे जाती है।






               आप किशोर और श्वेता की प्रेम कहानी जानना चाहते हैं तो कहानी दो गुलाब का फूल अवश्य पढ़े। किशोर और श्वेता की अधूरी प्रेम कहानी बहुत ही मार्मिक और दिल को छू लेने वाली है। 

  कहानी पढ़ने के लिए नीचे लिखे कहानी के टाईटल पर क्लिक करें 

         







       आपको पता है श्वेता के पहले भी किशोर के जीवन में एक लड़की आई थी गरिमा। दोनों का साथ तो कुछ ही दिनों का था, मगर दोनों सातों जन्म तक साथ रहने का वादा कर चुके थे। 

       किशोर के उस प्यार का क्या हुए ?  गरिमा का प्यार क्यों अधूरा रहा ? जानने के लिए कहानी सात जन्मों का अधूरा बंधन एक बार जरूर पढ़े। 

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