उसकी माँ / Usaki Maa | भाग- छठा | आखिरी सांसों का वादा | कुमार सरोज | किशोरवाणी |
💔 उसकी माँ
आख़िरी साँसों का वादा
✍️ कुमार सरोज
बनारस की शाम धीरे-धीरे रात की गोद में समा रही थी।
विश्वविद्यालय की घंटी बज चुकी थी। छात्र-छात्राएँ अपने-अपने घरों की ओर लौट रहे थे।
सौम्या ने स्टाफ रूम की मेज़ पर रखी अपनी किताबें समेटीं, बैग कंधे पर डाला और बाहर निकल आई। आज उसका चेहरा कई दिनों बाद बिल्कुल निश्चिंत था। क्योंकि अदालत का फैसला उसके पक्ष में आ चुका था। बरसों से जो बोझ उसके सीने पर रखा था, वह मानो उतर गया था।
उसने स्कूटी स्टार्ट की और मुस्कराते हुए मन ही मन कहा—
"अब मेरी ज़िंदगी केवल मेरी बेटी की है...। "
मगर उसे क्या पता था कि कोई और भी उसी रास्ते पर उसकी प्रतीक्षा कर रहा था।
उसी समय शहर के एक सुनसान मोड़ पर, सड़क किनारे एक काली एसयूवी खड़ी थी। उसके शीशे बंद थे। अंदर बैठा आदमी दूर से आती स्कूटी को बड़ी गौर से देख रहा था। उसके होंठों पर एक ठंडी मुस्कान उभरी।
स्कूटी जैसे ही पास पहुँची, एसयूवी धीरे-धीरे आगे बढ़ी। और अगले ही पल सड़क पर लोगों की चीख गूँज उठी।
एक तेज़ रफ़्तार ट्रक ने सामने से आकर सौम्या की स्कूटी को टक्कर मार दी। स्कूटी कई फीट दूर जा गिरी। किताबें हवा में बिखर गईं। सड़क पर सन्नाटा छा गया। कुछ लोग दौड़ पड़े। किसी ने एम्बुलेंस को फोन किया।
कोई घायल स्त्री की नब्ज़ टटोल रहा था। सौम्या की साँसें चल रही थीं, लेकिन बहुत धीमी। उसकी आधी खुली आँखें जैसे किसी एक चेहरे को खोज रही थीं।
❤️📖 अब आप नीचे दिये गए QR Code को स्कैन करके भी कहानी पढ़ सकते हैं -
फोन की घंटी बजी। घर पर उस समय केतकी निधि को खाना खिला रही थी।
"हेलो...। "
दूसरी तरफ़ से घबराई हुई आवाज़ आई—
"क्या आप प्रोफेसर सौम्या के घर से बोल रही हैं?"
"जी..। "
"उनका एक्सीडेंट हो गया है। तुरंत सिटी हॉस्पिटल आइए।"
केतकी के हाथ से फोन छूट गया। उसका दिल जैसे बैठ गया।
केतकी बिना एक पल गंवाए पड़ोसी महिला की गोद में छोटी-सी निधि को छोड़कर अस्पताल की ओर दौड़ पड़ी।
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड के बाहर डॉक्टरों की भागदौड़ मची थी।
केतकी की साँसें तेज़ थीं। उसने डॉक्टर का हाथ पकड़ लिया।
"मेरी बेटी कैसी है?"
डॉक्टर ने गंभीर स्वर में कहा—
"हम पूरी कोशिश कर रहे हैं। लेकिन चोट बहुत गहरी है।"
केतकी की आँखों से आँसू बह निकले। वह भगवान के सामने हाथ जोड़कर खड़ी हो गई।
"हे महादेव... इस बार मेरी उम्र भी मेरी बेटी को दे दो, उसकी बच्ची अभी बहुत छोटी है। "
करीब एक घंटे बाद डॉक्टर बाहर आए। उनके चेहरे की ख़ामोशी ही सब कुछ कह रही थी।
"मरीज आपसे मिलना चाहती हैं। "
केतकी लड़खड़ाते कदमों से आईसीयू में पहुँची।
सौम्या ऑक्सीजन मास्क लगाए लेटी थी। चेहरा पीला पड़ चुका था। लेकिन आँखों में वही ममता थी, जो हमेशा रही थी।
केतकी उसके सिरहाने बैठ गई।
"बिटिया...। तुझे कुछ नहीं होगा। "
📖✨ नियमित कहानियां पढ़ने के लिए किशोरवाणी WhatsApp चैनल से जुड़िए ❤️
सौम्या ने बहुत कठिनाई से सिर हिलाया। उसने काँपते हाथ से केतकी का हाथ पकड़ लिया।
बहुत धीमी आवाज़ में बोली—
"माँ...। रोइए मत। "
केतकी फूट पड़ी।
"तू ठीक हो जाएगी बिटिया, हम दोनों मिलकर निधि को बड़ा करेंगे..."
सौम्या की आँखों के कोने भीग गए।
उसने धीमे से कहा—
" शायद, अब यह काम आपको अकेले करना होगा। "
केतकी ने तुरंत उसका मुँह हाथ से ढक दिया।
"ऐसी अशुभ बातें मत कर। "
सौम्या हल्का-सा मुस्कराई।
"माँ... अगर मैं न रहूँ, तो निधि को कभी यह मत महसूस होने देना कि उसकी माँ नहीं है। "
केतकी ज़ोर-ज़ोर से सिर हिलाने लगी।
"नहीं बिटिया मैं ऐसा होने ही नहीं दूँगी। "
सौम्या की साँसें अब और भारी हो रही थीं।
उसने फिर कहा—
"उसे.... पढ़ाना... बहुत पढ़ाना... । वह किसी पर निर्भर होकर नहीं... अपने पैरों पर खड़ी होकर जीना सीखे। "
कुछ पल रुककर उसने फिर कहा—
"और... उसे नफ़रत करना मत सिखाइएगा...। नफ़रत... इंसान को अंदर से जला देती है। "
केतकी अब खुद को संभाल नहीं पा रही थी।
"बिटिया... और कुछ कहना है?"
सौम्या की आँखें दरवाज़े की ओर उठीं।
"मेरी...निधि... एक बार...। "
केतकी तुरंत बाहर भागी।
लेकिन डॉक्टर ने रोक दिया।
"बच्ची बहुत छोटी है, उसे अंदर नहीं ले जा सकते। "
केतकी की दुनिया जैसे वहीं थम गई।
वह वापस आई। उसने झुककर सौम्या के माथे को चूम लिया।
"मैं वादा करती हूँ, आज से निधि मेरी साँस होगी... मेरी बेटी होगी। मैं उसे कभी अकेला नहीं छोड़ूँगी। '
सौम्या के होंठों पर बहुत हल्की मुस्कान आई। मानो उसे वही उत्तर चाहिए था। उसने धीरे-धीरे आँखें बंद कर लीं।
मॉनिटर पर चलती धड़कनों की रेखा अचानक सीधी हो गई।
बीईईईप...
पूरा कमरा मौन हो गया।
केतकी चीख उठी—
"सौम्या...! बेटी...!"
लेकिन इस बार उसकी आवाज़ सुनने वाला कोई नहीं था।
उस दिन एक माँ इस दुनिया से चली गई और उसी क्षण एक दूसरी माँ का जन्म हुआ। वह माँ थी- केतकी।
क्रमशः आगे ...
📖💌📖 उसकी मां कहानी के यदि आपने अभी तक पीछे का भाग नहीं पढ़ा है तो उसे एक बार जरूर पढ़िए। प्रेम, परिवार और आपसी रिश्तों की बहुत ही मार्मिक और दिल को छू लेने वाली पारिवारिक कहानी है।
पीछे के भाग को पढ़ने के लिए नीचे लिखे कहानी के शीर्षक पर क्लिक कीजिए -
💅 उसकी मां
❤️ किशोरवाणी को आपका समर्थन
हमारी कहानियों को पढ़ने के लिए आपका प्यार ही हमारी सबसे बड़ी प्रेरणा है।
यदि आपको हमारी कोई कहानी पसंद आई हो और आप किशोरवाणी के साहित्यिक कार्य को आगे बढ़ाने में स्वेच्छा से योगदान करना चाहते हैं, तो आप अपनी इच्छा अनुसार योगदान कर सकते हैं।
आपका छोटा-सा योगदान हमें नई कहानियाँ लिखने और प्रकाशित करने की प्रेरणा देगा।
🙏 धन्यवाद — किशोरवाणी परिवार
UPI ID - 9430972634-4@ybl
❤️ अगर यह कहानी आपके दिल को छू गई हो...
👉 किशोरवाणी को फॉलो करें, जहाँ हमेशा ऐसी ही भावनात्मक, प्रेरणादायक और सामाजिक कहानियाँ प्रकाशित होती हैं।
💬 नीचे कमेंट करके ज़रूर बताइए कि कहानी का कौन-सा हिस्सा आपको सबसे ज़्यादा पसंद आया।
📲 इस कहानी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ शेयर करें, क्योंकि शायद किसी एक व्यक्ति तक यह संदेश पहुँचना ज़रूरी हो।
📖 आपकी एक टिप्पणी और एक शेयर हमें बेहतर कहानियाँ लिखने की प्रेरणा देता है।
धन्यवाद ❤️
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
अपनी प्रतिक्रिया अवश्य दें। आपका कॉमेंट हमें बेहतर लिखने की प्रेरणा देता है।