बिंदिया और बबलू – अध्याय 8 | डीएम साहब के सामने बबलू की परीक्षा / bindiya-aur-bablu-cheptar-8-dm-sahab-ke-samne-bablu-ki-pariksha
👩❤️👩 बिंदिया और बबलू 👩❤️👩
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दरधा नदी के किनारे बसे शांत गांव मंझार में रहने वाले लोग बबलू को गांव का सबसे पढ़ा-लिखा, होनहार और समझदार युवक मानते हैं। लेकिन यह सम्मान एक ऐसे राज पर टिका है, जिसे केवल बबलू और उसकी पत्नी बिंदिया ही जानते हैं—बबलू वास्तव में पढ़ा-लिखा नहीं है। वह अपनी हाजिरजवाबी, तेज दिमाग और बिंदिया की सूझबूझ के सहारे अब तक अपनी सच्चाई दुनिया से छिपाए हुए है।
शहर की पढ़ी-लिखी और समझदार लड़की बिंदिया ने प्रेम विवाह कर बबलू का साथ चुना। शादी के बाद जब उसे अपने पति की असलियत का पता चला, तब भी उसने उसका साथ छोड़ने के बजाय उसकी ताकत बनने का फैसला किया। दोनों हमेशा के लिए मंझार गांव आकर बस जाते हैं।
गांव में बिंदिया का भव्य स्वागत होता है। उसकी सादगी, व्यवहार और शिक्षा से पूरा गांव प्रभावित हो जाता है। बबलू गांव के विकास का सपना लेकर रात्रि पाठशाला शुरू करता है, जहां बिंदिया बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को पढ़ाने का जिम्मा संभाल लेती है। देखते ही देखते गांव में शिक्षा की नई अलख जगने लगती है।
लेकिन इस सुखद माहौल के बीच एक तूफान भी पल रहा है। गांव का युवक रंजीत, जो कभी बिंदिया से प्रेम करता था, अब हर हाल में बबलू की सच्चाई उजागर करना चाहता है। वह कभी चिट्ठी पढ़वाकर, कभी अंग्रेज़ी के सरकारी पत्र से और कभी दूसरी चालें चलकर बबलू को सबके सामने बेनकाब करने की कोशिश करता है। मगर हर बार बबलू अपनी चतुराई और बिंदिया की समझदारी से उसकी साजिश नाकाम कर देता है।
दूसरी ओर महेश, योगेश और सुजीत की मासूम हरकतें और हास्यपूर्ण नोकझोंक कहानी को हल्का और मनोरंजक बनाए रखती हैं। महेश अपनी शहरी भाभी का सबसे बड़ा भक्त बन चुका है, जबकि योगेश सुंदर पत्नी पाने के सपने में रोज कोई नया कारनामा कर बैठता है।
अब पूरे गांव में एक नई हलचल मची है। खबर आई है कि जिला अधिकारी (डीएम) साहब स्वयं मंझार गांव आने वाले हैं। गांव उनकी अगवानी की तैयारियों में जुटा है, लेकिन रंजीत इसे बबलू की असलियत उजागर करने का सबसे सुनहरा मौका मान रहा है।
उधर बबलू के मन में भी पहली बार डर घर करने लगा है। उसे लगने लगा है कि शायद अब उसकी जिंदगी की सबसे कठिन परीक्षा सामने आने वाली है...
डीएम साहब के सामने बबलू की परीक्षा
( अध्याय - 8 )
✍️ किशोर
मंझार गांव में आज ऐसा लग रहा था जैसे कोई बड़ा त्योहार मनाया जा रहा हो। जिस कच्ची सड़क पर रोज सिर्फ बैलगाड़ी और साइकिल दिखाई देती थी, आज उसी रास्ते पर सरकारी गाड़ियों का काफिला आने वाला था।
गांव के बच्चे नए कपड़े पहनकर हाथों में फूल लिए खड़े थे। बूढ़े-बुजुर्ग अपने सिर पर गमछा रखे चौपाल के पास जमा थे। महिलाओं ने भी अपने-अपने घरों के सामने आंगन साफ कर रंगोली बना दी थी।
सरपंच साहब की नजर जैसे ही गांव की ओर आ रही गाड़ियों के काफिले पर पड़ी उनका सीना जोर जोर से धड़कने लगा। डीएम साहब कुछ ही समय में गांव में पधारने वाले थे।
पूरा गांव स्वागत के लिए तैयार हो गया।
गाड़ी से डीएम साहब उतरे। सरपंच साहब ने आगे बढ़कर उनका स्वागत किया।
"आपका हमारे छोटे से गांव मंझार में स्वागत है साहब।"
डीएम साहब मुस्कुराए।
"छोटा गांव मत कहिए सरपंच जी। गांव छोटा-बड़ा नहीं होता, वहां रहने वाले लोगों के सपने बड़े होने चाहिए।"
बबलू ध्यान से उनकी बातें सुन रहा था।
डीएम साहब की नजर बबलू पर गई।
"ये कौन हैं ?"
सरपंच साहब गर्व से बोले—
"साहब, ये हमारे गांव के सबसे पढ़े-लिखे युवक बबलू सिंह हैं। शहर की नौकरी छोड़कर गांव की सेवा करने आए हैं।"
डीएम साहब ने मुस्कुराकर हाथ मिलाया।
"बहुत अच्छी बात है। आजकल युवा गांव छोड़कर शहर भाग रहे हैं और आप गांव लौटकर आए हैं। यह प्रेरणादायक है।"
रंजीत भीड़ में खड़ा सब देख रहा था।
उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी। उसके मन में बस एक ही ख्याल बार बार आ रहा था।
" बस थोड़ी देर और... अब पता चलेगा असली पढ़ाई कितनी है।"
डीएम साहब सबसे पहले गांव की समस्याएं सुनने चौपाल पर बैठे।
सरपंच साहब ने गांव की समस्याएं बतानी शुरू कीं।
" साहब, हमारे यहां सबसे बड़ी समस्या शिक्षा और पानी की है। "
डीएम साहब ने पूछा—
" शिक्षा के लिए क्या प्रयास किए गए हैं? "
सरपंच साहब तुरंत बोले—
"बबलू ने गांव में रात्रि पाठशाला शुरू करवाई है। उनकी पत्नी बिंदिया गांव की महिलाओं और बच्चों को पढ़ा रही हैं।"
डीएम साहब ने बिंदिया की तरफ देखा।
"बहुत अच्छा काम कर रही हैं आप।"
बिंदिया ने विनम्रता से कहा—
"साहब, अगर गांव की महिलाएं और बच्चे पढ़ेंगे तभी गांव आगे बढ़ेगा।"
डीएम साहब प्रभावित हुए।
तभी रंजीत ने मौका देखकर बात छेड़ दी।
"साहब, बबलू भईया तो बहुत अच्छा काम कर रहे हैं। इनके जैसा पढ़ा-लिखा आदमी गांव को मिलना सौभाग्य है।"
उसकी आवाज में तारीफ कम और चाल ज्यादा थी।
वह आगे बोला—
"अगर आप चाहें तो बबलू भईया गांव की शिक्षा व्यवस्था के बारे में विस्तार से बता सकते हैं।"
बबलू समझ गया कि यह रंजीत की नई चाल है।
सबकी नजरें अब बबलू पर थीं।
बबलू कुछ क्षण शांत रहा। उसके मन में हलचल होने लगी। उसे पता था कि असली परीक्षा अब शुरू हुई है।
तभी बिंदिया की नजर उससे मिली। उसकी आंखों में विश्वास था। जैसे वह कह रही हो—
"आप अकेले नहीं हैं।"
बबलू के चेहरे पर आत्मविश्वास लौट आया। वह आगे बढ़ा।
"साहब, शिक्षा सिर्फ किताब पढ़ने का नाम नहीं है। शिक्षा सोच बदलने का नाम है.............. .......। "
बबलू ने जो एक बार बोलना शुरू किया फिर बोलता ही गया। उसकी बात को पूरा चौपाल शांत होकर सुन रहा था।
बबलू ने गांव की शिक्षा, खेती, पानी और युवाओं के रोजगार पर अपनी बात बहुत ही शानदार तरीके से रखी।
डीएम साहब भी बबलू की बात बहुत ही ध्यान से सुन रहे थे।
लेकिन भीड़ में खड़ा रंजीत हैरान था।
" ये कैसे हो सकता है ? जिसे किताब पढ़नी नहीं आती, वह इतनी बड़ी-बड़ी बातें कैसे कर रहा था ?"
उसका दिमाग एक बार फिर उलझ गया।
पास खड़ा दिनेश धीरे से बोला—
" भईया , लगता है बबलू को जाल में फसाना इतना आसान नहीं है।"
रंजीत ने दांत पीसते हुए कहा—
"आसान नहीं है... लेकिन नामुमकिन भी नहीं।"
डीएम साहब ने अंत में बबलू की ओर देखकर कहा—
" बबलू जी, आपकी सोच देखकर खुशी हुई। अगर गांव के युवा इसी तरह आगे आएं तो गांव बदल सकते हैं।"
पूरा गांव तालियों से गूंज उठा।
महेश तो खुशी के मारे नाचने लगा।
" हमारे भईया सबसे अलग हैं!"
योगेश ने सुजीत से कहा—
"देखा, हम पहले ही बोले थे कि बबलू भइया हमारे गांव की शान हैं।"
सुजीत मुस्कुराकर बोला—
"तुम तो कल तक भाभी देखने के लिए मंदिर में नहा रहे थे। अब ज्ञान बांट रहे हो।"
दोनों फिर हंस पड़े।
उधर रंजीत चुपचाप वहां से निकल गया। आज भी उसकी चाल नाकाम हो गई थी।
लेकिन उसके मन में अब एक और खतरनाक विचार जन्म ले चुका था।
" बबलू को सबके सामने गिराना है तो उसकी कमजोरी तक पहुंचना होगा। "
और उसे पता था... बबलू की सबसे बड़ी कमजोरी है — उसका छुपा हुआ उसके अनपढ़ होने का सच।
क्रमशः आगे...
अगले अध्याय में पढ़िए...
रंजीत की नई चाल क्या होगी ?
क्या वह बबलू की असली पढ़ाई का राज पता कर पाएगा ?
बिंदिया को लेकर गांव में कौन सा नया विवाद खड़ा होने वाला है ?
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