बिंदिया और बबलू अध्याय 6 | पहला इम्तिहान | डीएम साहब के आने से बढ़ी बबलू की चिंता / bindiya-aur-bablu-chapter-6-hindi-novel







          👩‍❤️‍👩   बिंदिया और बबलू  👩‍❤️‍👩


    📖 अभी तक आपने पढ़ा...


            दरधा नदी के किनारे बसे छोटे-से गांव मंझार में रहने वाले लोग बबलू को गांव का सबसे पढ़ा-लिखा और होनहार युवक मानते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि बबलू पढ़ा-लिखा नहीं, बल्कि एक ऐसा इंसान है जो अपनी बातों और चालाकी से लोगों को प्रभावित करना जानता है।

बबलू ने अपनी मीठी बातों के जाल में फंसाकर शहर की पढ़ी-लिखी और खूबसूरत लड़की बिंदिया से शादी कर ली। शादी के कुछ ही दिनों बाद बबलू के पिता की मृत्यु हो जाती है और तभी बिंदिया को अपने पति की असली सच्चाई पता चलती है कि वह अनपढ़ है। लेकिन हालात को स्वीकार कर वह बबलू का साथ निभाने का फैसला करती है।

इसके बाद बबलू और बिंदिया हमेशा के लिए गांव आ जाते हैं। पूरे गांव में उनके स्वागत की धूम मच जाती है। बिंदिया की सुंदरता और सादगी देखकर गांव वाले उसके मुरीद हो जाते हैं।

इसी बीच गांव का दबंग और बबलू का पुराना दुश्मन रंजीत, बिंदिया को देखते ही चौंक जाता है, क्योंकि बिंदिया कभी उसके कॉलेज की प्रेमिका रह चुकी थी। रंजीत यह जानकर जल उठता है कि बिंदिया अब बबलू की पत्नी है। वह हर हाल में बबलू की सच्चाई सबके सामने लाने का प्रण कर लेता है।

रंजीत कई बार चाल चलता है—कभी चिट्ठी पढ़वाने की कोशिश करता है, कभी अंग्रेजी का पत्र सामने रख देता है, लेकिन हर बार बबलू अपनी चतुराई और बिंदिया की मदद से बच निकलता है। दूसरी ओर, गांव वाले बबलू को और भी बड़ा विद्वान समझने लगते हैं।

बबलू गांव में एक रात्रि पाठशाला शुरू करता है, जहां बिंदिया गांव के बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को पढ़ाने लगती है। धीरे-धीरे बिंदिया पूरे गांव की प्रिय बन जाती है।

उधर महेश, योगेश और सुजीत अपने हास्यपूर्ण कारनामों से कहानी में रंग भर रहे हैं। योगेश तो सुंदर पत्नी पाने के सपने में कभी मंदिर के चक्कर लगाता है तो कभी ठगी का शिकार हो जाता है।

लेकिन रंजीत हार मानने वालों में से नहीं है। अब वह बबलू का राज खोलने के लिए साम, दाम, दंड और भेद—हर हथकंडा अपनाने को तैयार है।

           
                                       अब आगे.......






            👩‍❤️‍👩  पहला इम्तिहान  👩‍❤️‍👩

                  ( अध्याय – 6 ) 


                                        ✍️  किशोर 



               मंझार गांव की सुबह उस दिन कुछ अलग ही थी। पूर्व दिशा में सूरज की लालिमा फैल रही थी और गांव के बाहर वाले पीपल के पेड़ पर बैठे पंछी चहचहा रहे थे। पुस्तकालय के बरामदे में बिछी चटाइयों पर बच्चे, बूढ़े और औरतें एक-एक करके जमा होने लगे थे।

रात्रि पाठशाला का यह दूसरा दिन था।

बिंदिया एक तरफ रखे ब्लैकबोर्ड पर बड़े-बड़े अक्षरों में लिख रही थी—

अ – अनार
आ – आम

सामने बैठा महेश माथे पर हाथ रखे ऐसे देख रहा था, मानो कोई बहुत बड़ी पहेली सुलझा रहा हो।

" महेश देवर जी, बताइए 'क' से क्या होता है ? "

  बिंदिया मुस्कराकर बोली।

महेश झट खड़ा हो गया।

"क से... कद्दू ! "

पूरा बरामदा हंसी से गूंज उठा।

सुजीत ने डांटते हुए कहा —

" अरे बुद्धू ! कल ही तो पढ़ाए थे—क से कबूतर। "

महेश ने सिर खुजाते हुए कहा—

  " डॉक्टर बाबू, कबूतर उड़ जाता है, इसलिए याद नहीं रहता। कद्दू घर में रहता है, इसलिए याद रह जाता है। "

इस बार तो बिंदिया भी अपनी हंसी न रोक सकी।

उधर योगेश सबसे आगे बैठा था, लेकिन उसकी नजर किताब पर कम और बिंदिया पर ज्यादा थी।
 वह धीरे से बोला - 

  " भाभी, हमको भी अंग्रेजी पढ़ा दीजिए। "

" क्यों ? अंग्रेजी सीखकर क्या करिएगा ? "

योगेश ने सीना चौड़ा करते हुए कहा—

"शहर वाली लड़की से शादी करेंगे।"

महेश तुरंत बोल पड़ा—

" पहले गांव वाली ही मिल जाए, वही बहुत है। "

फिर तो सारी पाठशाला ठहाकों से गूंज उठी।

बबलू पास ही बैठा सभी को देखता हुआ बस मुस्कुरा रहा था। 

इसी बीच सरपंच साहब पुस्तकालय में आ पहुंचे।

" सब लोग जरा चुप हो जाइए, हमको एक जरूरी बात कहनी है।"

सभी शांत हो गए।

"अभी-अभी प्रखंड कार्यालय से खबर मिली है कि अगले हफ्ते जिला अधिकारी साहब हमारे गांव आने वाले हैं।"

पूरा बरामदा खुशी से भर उठा।

 सरपंच ने गर्व से कहा - 

" और हम चाहते हैं कि गांव की ओर से उनका स्वागत हमारा होनहार बेटा बबलू करे। "

यह सुनते ही सब लोग ताली बजाने लगे।

लेकिन बबलू का चेहरा एकदम उतर गया।

उसके मन में जैसे किसी ने पत्थर रख दिया हो।

उसे सबसे बड़ा डर अंग्रेजी का था। जिला अधिकारी साहब अगर उससे अंग्रेजी में बात करने लगे तो ?

ताली बजाती भीड़ के बीच उसे अपने कानों में केवल एक ही आवाज सुनाई दे रही थी—

" अब क्या होगा ? "


  रात को खाना खाने के बाद बिंदिया ने देखा कि बबलू खाट पर चुपचाप बैठा है।

" क्या बात है ? आज बहुत चिंतित दिख रहे हैं। "

बबलू ने धीरे से कहा—

" डीएम साहब के आने की बात सुनकर थोड़ा डर लग रहा है।"

" डर... और आपको ? "

" हां, मुझे।"

बिंदिया मुस्कुराई।

" जो आदमी बिना पढ़े पूरे गांव को अपना मुरीद बना सकता है, वह डीएम से क्यों डरेगा ? "

बबलू ने उसकी ओर देखा।

" अगर उन्होंने अंग्रेजी में बात कर ली तो ? "

बिंदिया हंस पड़ी।

" आपके पास हर समस्या का कोई न कोई उपाय रहता है। "

बबलू ने लंबी सांस ली।

" उपाय तो ढूंढ़ना ही पड़ेगा। इज्जत का सवाल है। "

कुछ देर दोनों चुप रहे।

फिर बिंदिया धीरे से बोली—

" एक बात कहूं ? "

" कहो। "

" आप पढ़े-लिखे नहीं हैं, यह सच है। लेकिन मैंने आपसे ज्यादा समझदार आदमी आज तक नहीं देखा। "

बबलू की आंखें भर आईं।

" बिंदिया, अगर तुम साथ हो तो दुनिया की कोई मुश्किल बड़ी नहीं लगती। "

बिंदिया मुस्कुराई और धीरे से उसके कंधे पर सिर रख दिया।

उधर गांव के बाहर नदी किनारे रंजीत अपने साथियों के साथ बैठा था। मदन चिलम सुलगा रहा था।

दिनेश ने कहा —

" सुना है, डीएम साहब गांव आने वाले हैं। "

रंजीत के चेहरे पर शैतानी मुस्कान फैल गई।

"अब आया ऊंट पहाड़ के नीचे।"

" क्या मतलब ?"

" मतलब यह कि इस बार बबलू नहीं बचेगा। डीएम साहब अंग्रेजी में बात करेंगे और वहीं उसका भेद खुल जाएगा। "

मदन खुशी से उछल पड़ा।

" वाह भईया! इस बार तो खेल खत्म। "

रंजीत ने दांत भींचकर कहा—

" मैंने ठान लिया है, अबकी बार उसकी पोल खोलकर ही रहूंगा। "


अगले दिन सुबह योगेश देवी मंदिर में पूजा करके लौट रहा था कि उसकी नजर नदी किनारे खड़ी एक लड़की पर पड़ी।

वह चौंक गया।

" अरे! यह तो वही लड़की है जिसने उस दिन मेरे पैसे ऐंठ लिए थे। "

लड़की ने भी उसे देख लिया।

वह मुस्कुराते हुए उसके पास आई।

" क्यों, बहुत नाराज हो ? "

योगेश थोड़ा पीछे हट गया।

" हम गरीब आदमी हैं बहिन जी, हमारे पास अब पैसा नहीं है। "

लड़की खिलखिलाकर हंस पड़ी।

" उस दिन मजबूरी थी। "

" ऐसी कैसी मजबूरी ? "

लड़की कुछ पल चुप रही।

फिर बोली—

" कभी फुर्सत में बताऊंगी।"

यह कहकर वह चली गई।

योगेश उसे जाते हुए देखता रह गया।

उसके मन में पहली बार उस लड़की को लेकर जिज्ञासा पैदा हुई।


शाम को अचानक पूरे गांव में खबर फैल गई—

" डीएम साहब परसों मंझार गांव आने वाले हैं ! "

गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।

सरपंच साहब तैयारी में लग गए।

लेकिन एक आदमी था, जिसकी नींद उड़ चुकी थी।

वह था—बबलू।

और दूसरा आदमी था, जिसकी खुशी का ठिकाना नहीं था।

वह था — रंजीत।

उस रात रंजीत अपने घर की छत पर खड़ा आसमान की ओर देखते हुए मुस्कुराया।

"अब देखता हूं, बबलू... तुम्हारी किस्मत तुम्हें कब तक बचाती है। "

उधर अपने आंगन में खड़ा बबलू भी आसमान की ओर देख रहा था।

उसने मन ही मन कहा —

" हे भगवान! इस बार मेरी लाज रख लेना। "

    और मंझार गांव की रात अपने भीतर एक नए तूफान का संकेत छिपाए धीरे-धीरे गहरी होती चली गई…



                                          क्रमशः आगे...





                             ❓अब आगे क्या होगा ...

         
          क्या रंजीत बबलू की असलियत गांव वालों के सामने ला पाएगा ?

क्या बिंदिया का पुराना रिश्ता उसके वर्तमान जीवन में तूफान लाएगा ?

क्या बबलू का झूठ हमेशा के लिए छिपा रह पाएगा ?

     और क्या बिंदिया अपने पति की इज्जत बचा पाएगी ?


👉  जानने के लिए पढ़ते रहिए – " बिंदिया और बबलू " का अगला रोमांचक अध्याय। 

           
            बिंदिया और बबलू    उपन्यास के पीछे का अध्याय यदि आपने अभी तक नहीं पढ़ा है तो उसे पढ़ने के लिए नीचे लिखे उपन्यास के टाईटल पर क्लिक कीजिए - 





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