ऑफिस वाली परछाई – सरकारी ऑफिस की खौफनाक आत्मा की सच्ची कहानी / office-wali-parchai-true-horror-story







                  “कहते हैं कुछ ऑफिस सिर्फ काम करने की जगह नहीं होते…
वहां कई अधूरी कहानियां, दबे हुए राज और अनसुनी चीखें भी कैद होती हैं।

रांची के एक पुराने सरकारी ऑफिस में भी कुछ ऐसा ही था…

दिन में वहां फाइलें चलती थीं…
लेकिन शाम ढलते ही कंप्यूटर अपने आप ऑन होने लगते…
खाली कुर्सियां हिलने लगतीं…
और कई लोगों को महसूस होता कि वहां कोई और भी मौजूद है।

लोग उसे वहम समझते रहे…
लेकिन सच इससे कहीं ज्यादा डरावना था।

यह कहानी है एक ऐसी लड़की की…
जिसकी मेहनत से लोग जलते थे…
और जिसकी मौत के बाद भी उसकी आत्मा इंसाफ के लिए भटकती रही।






             💀 ऑफिस वाली परछाई 💀

                                  ✍️  किशोर 



झारखंड की राजधानी रांची।
तेजी से बदलता शहर…
ऊंची इमारतें…
भागती जिंदगी…
और उन्हीं के बीच खड़ा एक पुराना सरकारी ऑफिस।

दिन में वहां फाइलों की आवाज गूंजती थी…
लेकिन शाम ढलते ही उस ऑफिस की दीवारों पर एक अजीब सा सन्नाटा उतर आता था।

लोग कहते थे…

उस ऑफिस में कोई ऐसी चीज थी…
जो दिखती तो नहीं थी…
लेकिन हर वक्त वहां मौजूद रहती थी।

उसी शहर में रहती थी — सिमरन।

निडर…
आत्मविश्वासी…
और अपने सपनों के लिए लड़ने वाली लड़की।

आज उसकी जिंदगी का सबसे बड़ा दिन था।

उसे सरकारी ऑफिस में क्लर्क की नौकरी मिली थी।

घर में खुशी का माहौल था।

उसकी मां ने माथा चूमते हुए कहा —

“बेटी…
अब तू अपने पैरों पर खड़ी हो गई है।”

सिमरन मुस्कुराई।

“अब देखना मम्मी…
एक दिन आप लोगों का नाम रोशन करूंगी।”

अगले दिन…

सिमरन पहली बार ऑफिस पहुंची।

पुरानी लकड़ी की टेबलें…
धूल भरी फाइलें…
और दीवारों पर उतरता हुआ पुराना पेंट।

पूरा ऑफिस पुरुष कर्मचारियों से भरा था।

वह वहां अकेली महिला कर्मचारी थी।

कुछ लोग उसे देखकर मुस्कुरा रहे थे…
तो कुछ अजीब नजरों से देख रहे थे।

उन्हीं लोगों में एक था —  प्रमोद।

करीब चालीस साल का आदमी।

घमंडी…
आलसी…
और पुरानी सोच वाला।

उसे औरतों का ऑफिस में काम करना बिल्कुल पसंद नहीं था।

जब सिमरन उसके पास वाली सीट पर बैठी…
तो उसने धीमे स्वर में बड़बड़ाया —

“अब ऑफिस भी तमाशा बन गया है…”

दूसरे दिन…

सिमरन कंप्यूटर पर जरूरी फाइल तैयार कर रही थी।

तभी अचानक…

कंप्यूटर अपने आप ऑन-ऑफ होने लगा।

स्क्रीन बार-बार ब्लैक हो रही थी।

सिमरन परेशान हो गई।

“ओह नो…
आज ही इतना जरूरी काम था!”

उसे घबराया देख प्रमोद मन ही मन मुस्कुरा उठा।

वह धीरे से बोला —

“सरकारी ऑफिस है मैडम…
यहां मशीनें भी आराम करती हैं।”

सिमरन चिढ़ गई।

लेकिन कुछ कह नहीं पाई।

थोड़ी देर बाद प्रमोद बाहर चला गया।

जैसे ही वह बाहर निकला…

ऑफिस का माहौल अचानक अजीब हो गया।

खिड़कियां अपने आप हिलने लगीं।

हल्की ठंडी हवा चलने लगी।

और तभी…

ऑफिस के अंदर एक लड़की आई।

सफेद सलवार सूट…
बाल खुले हुए…
और चेहरे पर हल्की मुस्कान।

वह सीधे सिमरन के कंप्यूटर के पास गई।

कुछ सेकंड तक कीबोर्ड पर उंगलियां चलाती रही…

और फिर बोली —

“अब काम करिए…”

सिमरन कुछ समझ पाती…

उससे पहले ही वह लड़की गायब हो गई।

सिमरन हैरानी में कंप्यूटर स्क्रीन देखने लगी।

कंप्यूटर बिल्कुल सही चल रहा था।

लेकिन असली झटका तो अभी बाकी था।

उसने अपनी फाइल खोली…

तो देखा कि उसका अधूरा काम पहले से पूरा था।

एक-एक डाटा…
एक-एक रिपोर्ट…

सब तैयार।

सिमरन की आंखें फैल गईं।

“ये… ये कैसे हो सकता है?”

जब उसने फाइल अपने सीनियर को दी…

तो वह बहुत खुश हुए।

“वाह सिमरन!
इतना परफेक्ट काम?”

पूरा ऑफिस उसकी तारीफ करने लगा।

लेकिन प्रमोद के चेहरे पर जलन साफ दिखाई दे रही थी।

उसे समझ नहीं आ रहा था कि खराब कंप्यूटर में काम पूरा कैसे हो गया।

उस दिन के बाद…

जब भी सिमरन किसी काम में फंसती…

वही लड़की अचानक कहीं से आ जाती।

कभी कंप्यूटर ठीक कर देती…
कभी फाइल बना देती…
तो कभी जरूरी जानकारी बता देती।

लेकिन अजीब बात यह थी कि…

उसे सिर्फ सिमरन ही देख पाती थी।

बाकी लोगों को वहां कोई दिखाई नहीं देता था।

धीरे-धीरे प्रमोद सिमरन से नफरत करने लगा।

उसे लगने लगा कि सिमरन जानबूझकर उसे नीचा दिखा रही है।

एक दिन…

सिमरन ऑफिस के पुराने रिकॉर्ड देख रही थी।

तभी उसे एक पुरानी फोटो मिली।

फोटो देखकर उसका दिल जोर से धड़कने लगा।

उसमें वही लड़की थी…
जो रोज उससे मिलने आती थी।

फोटो के नीचे नाम लिखा था —

 “प्राची”

सिमरन तुरंत दूसरे कर्मचारियों के पास गई।

“ये लड़की कौन है?”

यह सुनते ही पूरे ऑफिस में सन्नाटा छा गया।

एक बूढ़ा कर्मचारी डरते हुए बोला —

“ये… प्राची थी…
बहुत साल पहले यहां काम करती थी।”

“अब कहां है?”

उस आदमी की आवाज कांप गई।

“मर चुकी है…”

सिमरन के पैरों तले जमीन खिसक गई।

अगले दिन…

शाम के समय ऑफिस लगभग खाली था।

तभी वही लड़की फिर उसके सामने आकर खड़ी हो गई।

इस बार उसके चेहरे पर मुस्कान नहीं थी।

सिर्फ दर्द था।

सिमरन धीरे से बोली —

“तुम… प्राची हो ना?”

लड़की की आंखें भर आईं।

“हां…”

सिमरन की सांसें तेज हो गईं।

“तुम… जिंदा नहीं हो?”

प्राची की आवाज भारी हो गई —

“प्रमोद ने मुझे मारा था…”

यह सुनते ही पूरा कमरा जैसे ठंडा पड़ गया।

प्राची धीरे-धीरे अपनी कहानी सुनाने लगी।

“मैं इस ऑफिस में सबसे तेज काम करती थी।
मुझे कंप्यूटर का बहुत ज्ञान था।”

उसकी आंखों में दर्द उतर आया।

“लेकिन प्रमोद आलसी था…
उसे हमेशा सीनियर की डांट सुननी पड़ती थी।”

अचानक ऑफिस की लाइटें टिमटिमाने लगीं।

प्राची बोली —

“उसे मुझसे जलन होने लगी…”

सिमरन का दिल कांप उठा।

“एक रात उसने मुझे ऑफिस में रोक लिया…”

प्राची की आंखों से आंसू बह निकले।

“और फिर…”

उसकी आवाज टूट गई।

“उसने मेरा गला दबाकर मुझे मार डाला…”

सिमरन सन्न रह गई।

प्राची धीरे से बोली —

“मैं इंसाफ चाहती हूं…”

सिमरन की आंखों में गुस्सा उतर आया।

“तुम्हें इंसाफ जरूर मिलेगा।”

उस दिन के बाद…

सिमरन ने प्रमोद के खिलाफ सबूत जुटाने शुरू कर दिए।

प्राची की आत्मा हर कदम पर उसकी मदद करती रही।

पुराने रिकॉर्ड…
सीसीटीवी हार्ड डिस्क…
और छुपी हुई फाइलें…

धीरे-धीरे सच्चाई बाहर आने लगी।

एक दिन पुलिस ऑफिस पहुंची।

प्रमोद पहले तो सब झूठ बोलता रहा।

लेकिन जब उसके सामने सबूत रखे गए…

तो वह टूट गया।

रोते हुए बोला —

“हां… मैंने ही मारा था उसे…”

पूरा ऑफिस सन्न रह गया।

जब पुलिस प्रमोद को ले जा रही थी…

तभी अचानक ऑफिस की लाइटें अपने आप जलने-बुझने लगीं।

और ऑफिस के आखिरी कोने में…

प्राची खड़ी मुस्कुरा रही थी।

उसकी आंखों में पहली बार सुकून था।

उस रात…

सिमरन ऑफिस में अकेली बैठी थी।

तभी कंप्यूटर स्क्रीन अपने आप ऑन हुई।

स्क्रीन पर सिर्फ एक लाइन लिखी थी —

Thank You Simran…”

और अगले ही पल…

स्क्रीन बंद हो गई।

उस दिन के बाद…

न तो ऑफिस में कोई अजीब घटना हुई…

और न ही किसी ने वहां कोई परछाई देखी।

शायद…

प्राची की आत्मा को आखिरकार इंसाफ मिल चुका था।



               🌑 डरावना संदेश 


“ईर्ष्या इंसान को सिर्फ बुरा नहीं बनाती…
कई बार उसे हैवान भी बना देती है।

प्राची की गलती सिर्फ इतनी थी कि वह अपने काम में सबसे बेहतर थी।
लेकिन किसी की जलन ने उसकी जिंदगी छीन ली।

मौत के बाद भी उसकी आत्मा उस ऑफिस में भटकती रही…
क्योंकि उसकी चीखें अभी अधूरी थीं…
उसे इंसाफ चाहिए था।

सिमरन ने उस दिन सिर्फ एक आत्मा की मदद नहीं की थी…
बल्कि यह साबित किया था कि सच चाहे कितने सालों तक अंधेरे में छुपा रहे…
एक दिन सामने जरूर आता है।

कहते हैं…
आज भी उस पुराने ऑफिस में देर रात कंप्यूटर अपने आप ऑन हो जाते हैं…

लेकिन अब वहां डर नहीं…
शायद एक आत्मा की शांति बसती है।



 🫸 खौफ की एक और डरावनी कहानी 🫷




                    उस रात दुल्हन अकेली नहीं थी एक बहुत ही मार्मिक और खौफ से भरी डरावनी कहानी है। सुहागरात के दिन दुल्हन के वेश में उसकी पहली पत्नी का आत्मा भूत बनकर आ जाती है। आप एक बार जरूर इस कहानी को पढ़िए। 

              कहानी पढ़ने के लिए नीचे लिखे कहानी के टाईटल पर क्लिक कीजिए - 




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