मोबाइल, मजबूरी और मरता बचपन | एक दर्द भरी कविता जो दिल को झकझोर देगी / mobile-aur-majburi-ke-beech-marta-bachpan-poem







आज का दौर अजीब है…
जहाँ एक तरफ बच्चों के हाथों में खिलौनों की जगह मोबाइल है,
तो दूसरी तरफ उन्हीं हाथों में
रोटी कमाने की मजबूरी भी है।

कहीं मां-बाप पास होकर भी दूर हैं,
तो कहीं हालात इतने कठोर हैं
कि बचपन को जीने का मौका ही नहीं मिलता…

यह कविता किसी एक बच्चे की नहीं,
बल्कि उस हर मासूम की आवाज़ है
जो धीरे-धीरे
अपने ही बचपन से दूर होता जा रहा है…








     मोबाइल, मजबूरी और मरता बचपन

                                        ✍️   किशोर 



किसी का बचपन
मोबाइल की स्क्रीन में कैद है,
तो किसी का बचपन
रोटी की तलाश में रोज़ सड़कों पर भटकता है।
खेल के मैदान सूने हैं,
और बचपन
अब समय से पहले ही थकता है।

मां-बाप घर में होते हुए भी
बच्चों से कोसों दूर हैं,
हाथों में फोन है,
पर बच्चों के सिर पर
अब भी स्नेह का हाथ अधूरा है।

कुछ माता-पिता
रोज़ी-रोटी की जंग में इतने उलझे हैं,
कि अपने ही बच्चों के कंधों पर
बचपन की जगह
जिम्मेदारियां रख देते हैं,
और वो नन्हे हाथ,
खिलौनों की जगह
मजबूरी उठाने लगते हैं।

कुछ बच्चे
ममता की कमी में चुप हो जाते हैं,
तो कुछ
हालात की मार से
बिना उम्र के ही बड़े हो जाते हैं।

अब बचपन
कहानियों में मिलता है,
हकीकत में नहीं…
रिश्ते टूट रहे हैं,
घर बिखर रहे हैं,
और हर कोने में
एक मासूम सपना मर रहा है।

कभी जो हंसी गूंजती थी गलियों में,
आज वहां सन्नाटा है—
और उस सन्नाटे में
एक सवाल गूंजता है।

क्या सच में
हम बच्चों को बचपन दे पा रहे हैं ?

या फिर—

मोबाइल, मजबूरी और बेरुख़ी के बीच
हर बच्चा
धीरे-धीरे
अपना बचपन खोता जा रहा है। 




                 💔  लड़कपन संदेश 

बचपन सिर्फ उम्र का एक पड़ाव नहीं होता,
यह जिंदगी की सबसे खूबसूरत नींव होता है…

अगर यही नींव
मोबाइल, मजबूरी और बेरुख़ी के बीच टूट जाएगी,
तो आने वाला कल
सिर्फ समझदार नहीं,
बल्कि अंदर से टूटा हुआ होगा…

सोचिए…
क्या हम अपने बच्चों को
सिर्फ बड़ा बना रहे हैं…
या सच में उन्हें
बचपन भी दे पा रहे हैं ?

क्योंकि अगर आज
हमने उनका बचपन नहीं बचाया,
तो कल
उनकी मुस्कान सिर्फ याद बनकर रह जाएगी।




    🫸मासूम बचपन की एक और कविता 🫷 




          आज समाज में कुछ लोगों को दो जून की रोटी नसीब नहीं होती है तो कुछ लोग खाना को बर्बाद करना ही अपनी शौक समझते हैं। " पापी पेट की कहानी "  बहुत ही मार्मिक कविता है, आप इसे एक बार जरूर पढ़िए।

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