चलो चाँद के पार चलें | दिल को छू लेने वाली हिंदी कविता / chalo-chand-ke-paar-chalein-hindi-poem
कभी-कभी ये दुनिया इतनी शोरगुल और तकलीफ़ों से भरी लगती है कि दिल कहीं दूर भाग जाना चाहता है—ऐसी जगह, जहाँ न कोई नफ़रत हो, न कोई छल, न कोई दर्द।
जहाँ सिर्फ सुकून हो, प्यार हो और एक सच्चा अपनापन हो।
यह कविता उसी ख्वाब की उड़ान है…
एक ऐसी दुनिया की तलाश, जहाँ इंसानियत अभी ज़िंदा हो,
जहाँ रिश्ते बोझ नहीं, बल्कि दिल का सहारा बनें।
आइए, कुछ पल के लिए इस हकीकत से ऊपर उठकर,
कल्पना के उस आसमान में चलें—
जहाँ हम फिर से जीना सीख सकें…
“चलो चाँद के पार चलें…”
🌙 चलो चाँद के पार चलें
✍️ किशोर
इस ज़ालिम दुनिया की हलचल से दूर,
चलो कहीं सुकून की छाँव तले चलें—
जहाँ दर्द की कोई परछाईं न हो,
आओ, चाँद के पार चलें।
विशाल नीले गगन की बाहों में,
स्वच्छंद सपनों के आसमाँ तले,
प्यार के कुछ निर्मल, अनमोल पल जी लें—
आओ, चाँद के पार चलें।
जहाँ न हो किसी के मन में जलन,
न हो भय का कोई अँधेरा,
उन्मुक्त पंछी बन, खुले गगन में उड़ें—
आओ, चाँद के पार चलें।
यहाँ किस पर अब यक़ीन करें,
जब अपने ही चेहरे बेगाने लगें,
टूटे दिल और कुंठित मन को लेकर—
आओ, चाँद के पार चलें।
एक नई दुनिया फिर से बसाएँ,
प्रेम के अंकुर दिलों में उगाएँ,
मिलकर एक नई सृष्टि रचें—
आओ, चाँद के पार चलें।
जहाँ प्रेम हर कण में रचा-बसा हो,
जहाँ द्वेष का कोई नामोनिशान न हो,
जहाँ इंसानियत हर रूह में बसती हो—
आओ, चाँद के पार चलें।
🌙 💫 प्यारा संदेश
शायद चाँद के पार कोई दुनिया सच में न हो…
लेकिन इस कविता का असली मकसद वहाँ जाना नहीं,
बल्कि इस दुनिया को ही इतना खूबसूरत बना देना है कि कहीं और जाने की ज़रूरत ही न पड़े।
अगर हम अपने दिलों में थोड़ी सी मोहब्बत,
थोड़ी सी इंसानियत और थोड़ी सी सच्चाई जगा लें,
तो यकीन मानिए—
यही धरती किसी जन्नत से कम नहीं होगी।
तो चलिए, भागते नहीं…
बल्कि इस दुनिया को ही बदलने की कोशिश करते हैं—
ताकि हर कोई कह सके…
“अब कहीं और जाने की ज़रूरत नहीं…
यही मेरी दुनिया है, यही मेरा चाँद है।”
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