तेरी सूरत का नशा – प्रेम और सौंदर्य पर आधारित एक सुंदर ग़ज़ल | teri-surat-ka-nasha-hindi-ghazal
प्रेम का एहसास अपने आप में एक अनोखा नशा होता है। जब किसी प्रिय व्यक्ति की सूरत, मुस्कान और उसकी मधुर वाणी दिल को छू जाती है, तो बिना किसी मदिरा के ही मन मादकता से भर उठता है। प्रेम की यही अनुभूति कभी-कभी इतनी गहरी हो जाती है कि हर क्षण उसी का ख्याल मन में बस जाता है।
इन्हीं भावनाओं को शब्दों में पिरोने का एक छोटा सा प्रयास है यह ग़ज़ल — “ तेरी सूरत का नशा ”।
तेरी सूरत का नशा
✍️ किशोर
तेरी सूरत को जो देखूँ, नशा छा जाता है,
बिन पिए ही दिल-ओ-जां पर नशा छा जाता है।
कजरारे नयन तेरे जैसे कोई तीखी कटार,
देखते ही मेरे दिल पर नशा छा जाता है।
मिसरी सी मधुर तेरी वाणी की जब धुन सुनूँ,
रोम-रोम मेरे तन पर नशा छा जाता है।
रेशमी जुल्फें जो चेहरे पे बिखर जाती हैं,
उस हसीं मंजर के संग ही नशा छा जाता है।
पायलें रुनझुन करें जब तू करीब आ जाए,
तेरे हर कोमल स्पर्श से नशा छा जाता है।
तेरे तेवर भी निराले, कभी रूठे कभी हँसे,
तेरी हर अदा को देखूँ नशा छा जाता है।
मेरे जीवन के सभी दुख भी सिमट जाते हैं,
तेरी बाहों में जो आऊँ नशा छा जाता है।
कभी-कभी किसी की एक झलक ही ऐसी मादकता दे जाती है कि बिना पिए ही दिल प्रेम के नशे में डूब जाता है।
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