मैं बिहार हूँ: बिहार के गौरव और इतिहास पर एक हृदयस्पर्शी कविता | किशोरवाणी । main-bihar-hoon-hindi-poem

     

           प्रस्तावना (Introduction)


                 "इतिहास के पन्नों को जब भी पलटेंगे, बिहार का नाम स्वर्ण अक्षरों में चमकता मिलेगा। यह केवल एक राज्य नहीं, बल्कि सभ्यता की पालना, ज्ञान का केंद्र और संघर्ष की जीती-जागती मिसाल है। जहाँ बुद्ध को बोध मिला, जहाँ महावीर ने शांति का मार्ग दिखाया और जहाँ चाणक्य की कूटनीति ने अखंड भारत का सपना बुना—वही मिट्टी आज भी अपनी कहानी कह रही है।

            आज की कविता 'मैं बिहार हूँ' के माध्यम से, मैं किशोरवाणी के पाठकों को उसी मिट्टी की खुशबू, उसी गौरवशाली अतीत और यहाँ के लोगों के अटूट स्वाभिमान की यात्रा पर ले जाना चाहता हूँ।

                आइए, महसूस करते हैं उस बिहार को, जो आज भी भारत की बुलंद आवाज़ है।"







                   मैं बिहार हूँ

                               ✍️ किशोर 


मैं अशोक का शौर्य प्रबल,
मैं बुद्ध का बोध-ज्ञान हूँ,
मैं सीता की पावन धरा,
मैं महावीर का वरदान हूँ,
मैं बिहार हूँ।

मैं आर्यभट्ट का शून्य अनूठा,
मैं कौटिल्य का अर्थशास्त्र हूँ,
मैं नालंदा की ज्ञान-ज्योति,
मैं दशरथ मांझी का अटल हठ हूँ,
मैं बिहार हूँ।

मैं दिनकर की प्रखर लेखनी,
मैं राजेंद्र बाबू की नीति हूँ,
मैं कुंवर सिंह का अमर त्याग,
मैं मेधावी युवाओं की प्रीति हूँ,
मैं बिहार हूँ।

मैं मिथिला की मधुर मिठास,
मैं मगध का गौरव-गान हूँ,
मैं भोजपुर का अदम्य साहस,
मैं अंग का स्वाभिमान हूँ,
मैं बिहार हूँ।

मैं पसीने से सींचा प्रदेश,
मैं श्रमवीरों का अभिमान हूँ,
मैं देश के हर जर्रे में बसा,
मैं भारत की बुलंद आवाज हूँ,
मैं बिहार हूँ।





               निष्कर्ष (Conclusion)


                "बिहार सिर्फ अतीत की गाथा नहीं है, बल्कि यह वर्तमान का वह पसीना है जो देश के हर निर्माण में शामिल है। चाहे वह नालंदा की ज्ञान-स्थली रही हो या आज के युवाओं की मेधा, बिहार ने हमेशा नेतृत्व किया है। 'मैं बिहार हूँ' केवल एक कविता नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति का स्वाभिमान है जो अपनी जड़ों से जुड़ा हुआ है।

                    यह कविता हमें याद दिलाती है कि हमारी विरासत कितनी महान है और हमारा भविष्य हमारी मेहनत और संकल्प पर टिका है।





              आपकी राय:


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