हर चेहरे में तलाश – “चेहरा उसका” | दिल छू लेने वाली हिंदी ग़ज़ल । Chehara - Usaka- hindi - gazal
इसी मासूम तड़प और अनदेखे प्रेम की भावना को बयां करती है यह ग़ज़ल “चेहरा उसका”।
इस ग़ज़ल में एक आशिक़ की वही बेचैनी है—जो हर गुजरते चेहरे में अपने ख़्वाब के चेहरे की झलक ढूँढता है। अजीब इत्तेफाक़ है… जिसे कभी देखा नहीं, उसी चेहरे को हर चेहरे में ढूँढता रहता हूँ।
हर चेहरे में तलाश – चेहरा उसका
✍️ किशोर
हर चेहरे में ढूँढा मैंने चेहरा उसका,
किस्मत ने मगर कब दिखाया चेहरा उसका।
हर हूर में देखा, हर इक नूर में ढूँढा,
फिर भी न कहीं मिल सका वो चेहरा उसका।
मैं कितना अजब हाल में रहता हूँ ये सोचकर,
देखा ही नहीं फिर भी बसाया चेहरा उसका।
हर ख़्वाब में आता है वो बनकर इक उजाला,
नींदों में चमक जाता है जैसे चेहरा उसका।
ऐ रब मेरी तन्हाई पे इतना तो करम कर,
बस ख़्वाब में इक बार दिखा दे चेहरा उसका।
जीना भी करूँगा मैं खुशी से इसी दम,
गर आँखों ने इक बार निहारा चेहरा उसका।
किशोर भी उसी आस में जीता ही रहेगा,
किस रोज़ मुकद्दर में हो आए चेहरा उसका।
देखा ही नहीं फिर भी बसाया है दिल में,
कैसी है मोहब्बत कि बस चेहरा उसका।
शायद मोहब्बत का यही सबसे खूबसूरत राज़ है,
जिसे कभी देखा नहीं, दिल उसी चेहरे इंतज़ार करता है।
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