पत्नी भाग गई | एक अभागे बाप की कहानी जो टूट कर भी नहीं टूटा / patni-bhag-gayi-true-emotional-story
इंसान को सबसे ज्यादा दर्द तब नहीं होता जब उसके पास पैसा नहीं होता, बल्कि तब होता है जब उसका अपना ही उसे बीच राह में छोड़ देता है। लेकिन कुछ लोग टूटकर बिखरते नहीं, बल्कि दर्द की आग में तपकर और मजबूत बन जाते हैं।
यह कहानी है दिल्ली के एक साधारण मजदूर मंगरू की, जिसके सपने बड़े थे और दुनिया बहुत छोटी। लेकिन एक रात उसकी दुनिया उजड़ गई। पत्नी उसे दो मासूम बच्चों के साथ छोड़कर चली गई। उस रात एक पति जरूर टूट गया, लेकिन उसी रात एक ऐसे पिता का जन्म हुआ, जिसने अपने बच्चों के लिए मां और बाप दोनों बनने की कसम खा ली।
पढ़िए एक ऐसे बाप की सच्ची कहानी, जिसके आंसुओं से ज्यादा मजबूत उसका प्यार था।
पत्नी भाग गई
✍️ किशोर
दिल्ली की भागदौड़ भरी जिंदगी में, एक साधारण मजदूर था — मंगरू। वह एक फैक्टरी में काम करता था। सुबह दस बजे घर से निकलता और रात के नौ बजे थका-मांदा लौटता। उसकी दुनिया बहुत छोटी थी, लेकिन उसी छोटी-सी दुनिया में उसके सारे सपने बसते थे। उसके परिवार में उसकी पत्नी ममता, तीन साल का बेटा राजा और एक साल की नन्ही बेटी रानी रहती थी।
शादी को चार साल हुए थे। मंगरू के पास न कोई बड़ी जमीन थी, न बैंक बैलेंस, लेकिन उसकी आंखों में दो अनमोल सपने जरूर थे।
वह अक्सर बच्चों को गोद में उठाकर मुस्कराते हुए कहता—
" राजा बेटा, तू खूब पढ़-लिखकर बड़ा अफसर बनेगा। और मेरी रानी डॉक्टर बनेगी। तुम्हें मेरी तरह मजदूरी नहीं करनी पड़ेगी। "
ममता हंसकर कहती—
" इतने बड़े-बड़े सपने देखते हो ? कोई सपना पूरा नहीं होगा। "
मंगरू मुस्करा देता—
" ममता हम गरीब आदमी के पास सपनों के सिवा होता ही क्या है ? "
इन्हीं सपनों को पूरा करने के लिए वह फैक्टरी में ओवरटाइम भी करता था। शरीर टूट जाता, लेकिन बच्चों का चेहरा देखते ही सारी थकान गायब हो जाती।
उस रात भी मंगरू रात के नौ बजे घर पहुंचा।
जैसे ही उसने दरवाजा खोला, घर के अंदर अजीब-सी खामोशी थी। तभी एक साल की रानी के रोने की आवाज सुनाई दी।
"अरे... रानी क्यों रो रही है ?"
तीन साल का राजा भी सिसकते हुए कोने में बैठा था।
मंगरू ने घबराकर पूछा—
" राजा बेटा, मां कहां है ? "
राजा मासूमियत से बोला—
"मम्मी बाहर गई हैं। बहुत देर हो गई है। रानी भूख लगी... भूख लगी कहकर रो रही है।"
मंगरू के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गईं।
उसने आस-पड़ोस में ममता के बारे में पूछा।
लेकिन कुछ लोगों की नजरें झुक गईं और कुछ लोग चुप हो गए।
आखिर एक बुजुर्ग ने भारी आवाज में कहा—
"बेटा... । तुम्हारी पत्नी मोहल्ले के एक लड़के के साथ भाग गई है। हमेशा के लिए.. । "
यह सुनते ही मंगरू के पैरों तले जमीन खिसक गई।
उसके कान सुन्न पड़ गए।
ऐसा लगा, जैसे किसी ने उसके सीने में खंजर घोंप दिया हो।
लेकिन तभी घर के अंदर से रानी के जोर-जोर से रोने की आवाज सुनाई दी।
उसने अपने आंसू पोंछे और खुद से कहा—
" रोने का वक्त नहीं है मंगरू... पहले बच्चों का पेट भरना है। "
मंगरू भागता हुआ पास के एक दुकान पर पहुंचा।
"भैया, दूध का पाउडर देना।"
दुकानदार ने डिब्बा पकड़ाते हुए कहा—
"लो भाई।"
मंगरू पैसे देकर जाने लगा, फिर अचानक रुक गया।
धीरे से बोला—
"भैया... एक बात पूछूं ? "
"हां पूछो।"
मंगरू की आंखें झुकी हुई थीं।
" ये... इस पाउडर से पीने वाला दूध कैसे बनता है ? "
दुकानदार मुस्करा कर बोला—
"अरे, इतना भी नहीं जानते ? घर जाकर अपनी पत्नी से पूछ लेना। वही बना देगी। "
यह सुनकर मंगरू कुछ पल चुप चाप खड़ा रहा।
उसकी आंखों में आंसू भर आए। उसका गला भर्रा गया।
बहुत मुश्किल से उसके होंठ हिले—
" भैया... मेरी पत्नी... आज ही भाग गई । "
सुनकर दुकानदार के हाथ वहीं रुक गए। चेहरे की मुस्कान गायब हो गई। कुछ क्षण के लिए पूरा माहौल जैसे जम गया।
उसने मंगरू की नम आंखों को देखा और फिर बिना कुछ कहे दुकान से बाहर निकलकर उसके कंधे पर हाथ रख दिया।
दुकानदार जिसका नाम दिनेश था धीरे से बोला—
" भाई, आज से तुम अपने आप को कभी अकेला मत समझना। जब भी किसी चीज की जरूरत पड़े, इस दुकान को अपना घर समझकर लेने आ जाना। "
इतना सुनते ही मंगरू फूट-फूटकर रो पड़ा।
वह इस लिए आज नहीं रो रहा था कि उसकी पत्नी चली गई थी। वह इसलिए रो रहा था क्योंकि आज उसे समझ आ गया था कि मां के बिना बच्चे कैसे पलेंगे।
उस रात दुकानदार दिनेश खुद मंगरू के साथ उसके घर गया। उसने दूध बनाकर रानी को पिलाया।
दिनेश राजा के लिए भी बिस्कुट लाया था। वह उसे भी खाने को बिस्कुट दिया।
दिनेश जाते-जाते मंगरू से बोला—
" भगवान ने मां छीन ली है, लेकिन बाप बनने की ताकत तुमसे नहीं छीनी है। तुम कभी हिम्मत मत हारना। "
दिनेश के जाने के बाद मंगरू ने अपनी बेटी को गोद में उठाया और बेटे के सिर पर हाथ फेरते हुए आसमान की ओर देखा।
नउसकी आंखों में अभी भी आंसू थे, लेकिन अब आवाज में दृढ़ता थी—
" सुन लो भगवान... अब मैं इन दोनों का बाप भी हूं और मां भी। चाहे जिंदगी जितनी परीक्षा ले, मैं अपने बच्चों के सपने कभी टूटने नहीं दूंगा। "
और उस रात पत्नी के भाग जाने के कारण एक पति जरूर टूट गया था, लेकिन उसी रात एक महान पिता का जन्म हुआ ।
❤️ भावुक संदेश ❤️
जिंदगी कभी-कभी इंसान से उसकी खुशियां छीन लेती है, लेकिन जिम्मेदारियां नहीं छीनती। रिश्ते टूट सकते हैं, भरोसे बिखर सकते हैं, लेकिन एक सच्चे पिता का प्यार कभी हार नहीं मानता।
मंगरू की कहानी हमें यही सिखाती है कि हालात चाहे कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो इंसान अकेला होकर भी एक पूरी दुनिया संभाल सकता है। मां का स्थान कोई नहीं ले सकता, लेकिन एक पिता अपने बच्चों के लिए अपना हर दर्द भूलकर मां की ममता और पिता का सहारा दोनों बन सकता है।
किस्मत ने मंगरू से उसकी पत्नी छीन ली, लेकिन उसके बच्चों से उनका पिता नहीं छीन सकी। यही एक सच्चे इंसान और महान पिता की पहचान है।
🫸बाप के संघर्ष की एक और कहानी 🫷
रास्ते में एक दिन उसे एक अबोध बच्ची लावारिस हालत में मिलती है। वह उसे पालने का मन बना लेता है। उल्टे लोग उसपर ही ताने मारने लगते हैं। उसकी प्रेमिका जिससे उसकी शादी होने वाली थी भी मुंह मोड़ लेती है। पढ़िए एक अविवाहित पिता के संघर्ष की बहुत ही मार्मिक कहानी।
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जवाब देंहटाएंबहुत बहुत धन्यवाद
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